
भूमिका :
आज का युग विज्ञान और तकनीकी का युग है। इस क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) विज्ञान की सबसे बड़ी, महत्वपूर्ण और क्रांतिकारी खोजों में से एक बन गई है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जिसका अर्थ है – ऐसी मशीनें और कम्प्यूटर सिस्टम को इस तरह काबिल बनाना कि वह इंसानों की तरह सोच सके, समझ सके, निर्णय ले सके और समस्याओं का समाधान निकाल सके।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता न केवल तकनीकी उपकरणों तक सीमित है बल्कि गहराई से देखने पर समझा जाएगा कि यह हमारे जीवन के लगभग हर क्षेत्र में – जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन, कृषि, सुरक्षा और अन्य मनोरंजन – के गहरे प्रभाव डाल रहा है या डाल चुका है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता का प्रभाव इतना बढ़ गया है कि यह केवल देश की तकनीकी और औद्योगिक विकास मात्र का हिस्सा नहीं रह गया है, बल्कि यह व्यक्तिगत जीवन, आर्थिक नीतियों और सामाजिक संरचना का भी महत्वपूर्ण विषय बन गया है। यही विषय पूरे विश्व के बड़े-बड़े देश चर्चा कर रहे हैं। और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ए.आई. के फायदे, जोखिम और नैतिक स्तर पर इसके ऊपर प्राथमिक रूप से निर्णय लेने का प्रयास किया जा रहा है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता का इतिहास
प्राचीन विचार :कृत्रिम बुद्धिमत्ता का इतिहास भले ही पुराना है, लेकिन इस विचार प्रणाली में पहले से ही मौजूद था। प्राचीन काल में कई मिथक और कहानियाँ इस बात को दर्शाती हैं कि इंसान ने हमेशा ऐसी यांत्रिक पुतलों और मशीनों की कल्पना की है जो उनके समान सोच सके। ऐसी मशीनें जो उनके समान चीजों को बता सके या उनके समान बुद्धि लिए हुए हों।
1940–50 का दशक :इस दशक में आधुनिक कंप्यूटर विज्ञान के विकास के साथ-साथ एआई का वैज्ञानिक आधार रखा गया। एलन ट्यूरिंग (Alan Turing) नामक वैज्ञानिक ने 1950 में एक शोध पत्र लिखा – “Computing Machinery & Intelligence (गणनात्मक यंत्र और बुद्धिमत्ता)” जिसके तहत उन्होंने “ट्यूरिंग टेस्ट” प्रस्तुत किया। जिसका उद्देश्य यह जानना था कि क्या मशीन इंसानों की तरह बुद्धिमत्ता दिखा सकती है|
1956 – AI (एआई) शब्द का जन्म :वैज्ञानिक जॉन मैकार्थी (John McCarthy) ने डार्टमाउथ कॉलेज में पहला कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पर सम्मेलन आयोजित किया था। यहाँ पहली बार कृत्रिम बुद्धिमत्ता शब्द का प्रयोग किया गया था। यह एआई के युग का आरंभ था।
1960–1970 शुरुआती दौर एआई का :इस दौर में पहली बार शतरंज खेलने वाले कंप्यूटर प्रोग्राम विकसित हुए। भाषा प्रक्रमण (Language Processing) और रोबोटिक्स के शुरुआती प्रयोग इसी दौर में किए गए। नियम आधारित प्रोग्रामों पर भी यहाँ जोर दिया गया।
1980–1990 (एक्सपर्ट सिस्टम और मशीन लर्निंग) : इस समय एक्सपर्ट सिस्टम आए, जो किसी विशेष क्षेत्र के मानव विशेषज्ञों जैसे निर्णय लेने की क्षमता दिखा सकते थे। इस दौर में मशीन लर्निंग का विकास हुआ, जिसमें मशीनें डेटा के द्वारा सीख सकती थीं, निर्णय ले सकती थीं और भविष्यवाणी कर सकती थीं।
2000 से अब तक :इस दौर में इंटरनेट, बिग डेटा (Big Data), डीप लर्निंग, क्लाउड कंप्यूटिंग, और एआई ने गति पकड़ी।एआई तकनीकों का प्रयोग हेल्थकेयर, मल्टी मीडिया, बैंकिंग, टैक्सटाइल आदि क्षेत्रों में होने लगा।एआई ने शिक्षा, उद्योग, सुरक्षा और मनोरंजन सभी क्षेत्रों में अपनी पकड़ बना ली है।
विश्वस्तरीय एआई (AI) समिट :
कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विकास और उसके प्रभाव को लेकर निरंतर बड़े-बड़े देश लगातार चर्चा कर रहे हैं और इसी उद्देश्य से कई अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों का आयोजन किया जा रहा है।
सबसे पहले हुआ – AI Safety Summit-2023 (एआई सेफ्टी समिट-2023)
यह समिट ब्रिटेन के ब्लेचले पार्क में 1–2 नवम्बर 2023 को आयोजित हुआ। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य था एआई से होने वाले खतरों पर चर्चा करना तथा सुरक्षित विकास के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दिशा-निर्देश बनाना / तय करना। संयुक्त राज्य, अमेरिका, यूरोपियन संघ, भारत और चीन जैसे 28 बड़े देशों ने इसमें हिस्सा लिया। भारत की ओर से – केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्री श्री राजीव चन्द्रशेखर उपस्थित थे।
इसके पश्चात् हुआ – AI Seoul Summit 2024 (एआई सियोल समिट 2024) में कोरिया और ब्रिटेन के संयुक्त प्रयास से 21–22 मई को आयोजित किया गया। इस सम्मेलन में एआई के द्वारा होने वाले विकास और इससे सम्बंधित खतरों पर विस्तृत चर्चा हुई। कृत्रिम बुद्धिमत्ता का सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय क्या प्रभाव पड़ रहा है इस पर विचार विमर्श हुआ।
इसके बाद – AI Action Summit 2025 (एआई एक्शन समिट 2025) पेरिस में आयोजित किया गया, जिसे फ्रांस और भारत ने सह-अध्यक्षता की। इस सम्मेलन में 100 से अधिक देशों के नेता, वैज्ञानिक और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।इसके भी उद्देश्य थे कि कैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लागू किया जा सकता है इस पर चर्चा हुई।
इसी श्रृंखला में – AI Impact Summit 2026
दिल्ली भारत में होने की योजना है। इस समिट में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के द्वारा पड़ने वाले प्रभाव और विकास के क्षेत्रों पर चर्चा होगी।
विश्व के लिए खतरा या वरदान
कृत्रिम बुद्धिमत्ता का विकास मानव जीवन के लिए कई तरह के बदलाव ला रहा है। इन बदलावों के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलू हैं, जो इस विश्व के लिए वरदान भी और खतरा भी बनाते हैं।
वरदान:
एआई ने मानव जीवन को तेज, सरल और उपयोगी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है। चिकित्सा के क्षेत्र में यह रोगों को व्यक्तित्व लक्षणों का अनुकरण कर स्वस्थ्य के क्षेत्र में यह बीमारी की जल्दी पता लगाने और शोध/उपचार योजनाओं को बनाने में मदद करता है। परिवहन के क्षेत्र में यह स्वचालित वाहनों दुर्घटनाओं का कम करने में सहायक, स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम से यातायात को पूर्ण नियंत्रण में रख सकता है।
कृषि के क्षेत्र में ड्रोन सिस्टम और स्मार्ट फार्म सिस्टम की मदद से फसलों की उत्पादन में मदद करता है।
सुरक्षा के क्षेत्र में भी ड्रोन सिस्टम उपयोग किया जा रहा है। ऑपरेशन सिंदूर में एआई का उपयोग किया गया। दुश्मनों के ठिकानों को खत्म करने के लिए और भी ऐसे क्षेत्र हैं, जिसमें एआई उपयोगी साबित हो रहा है। इसकी मदद से तैनाती और अनुसंधान के लिए समय और संसाधनों की बचत हो रही है।
वर्तमान समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का सही उपयोग मानवता के लिए निश्चित वरदान साबित हो सकता है।
खतरा
बेरोजगारी का खतरा: एआई आज के युग में मशीनें हमारे रोज़मर्रा कई कार्यों को इंसानों की तरह कर सकती हैं। इसलिए रोजगार की संभावनाएँ कम हो रही हैं। इसके द्वारा सामाजिक असमानताएँ बढ़ सकती हैं।
अत्यधिक निर्भरता और स्वचालन पर कमी: कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर इंसानों की काफी हद तक निर्भर रहने की प्रवृत्ति देखा गया है। जितनी उनके सोचने और कुछ नया करने की स्वचालन आदतों में कमी आई है। स्वचालन कार्य जैसे चिकित्सा, परिवहन, संचार और सुरक्षा का सामना इंसानों के हाथों से छीन लिया गया है।
निजी डाटा और गोपनीयता का खतरा एआई के माध्यम से व्यक्तिगत डाटा का दुरुपयोग संभव है। निश्चित रूप से इसके द्वारा गोपनीयता और सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है।
नैतिक मूल्यों का अभाव निश्चित तौर से मशीनों और उपकरणों में मानव जैसी नैतिकता और संवेदनशीलता नहीं होती है। वे बल्क़ुल यांत्रिक मशीनों की प्रोग्रामिंग द्वारा निर्देशित रहते हैं कि क्या करना है और कैसे करना है।
वैश्विक सुरक्षा का खतरा एआई का दुरुपयोग सामाजिक और अन्तर्राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक गंभीर चुनौती बन सकता है। एआई का उपयोग युद्ध और हथियारों के संचालन के लिए भी किया जा सकता है।
विशिष्टों की चेतावनी एलन मस्क (Elon Musk), सुंदर पिचाई और योशुआ बेंजियो जैसे महान हस्तियों ने भी स्वयं एआई का स्वागत किया, और खुद भी कई एआई मॉडल बनाए, पर यह लोग स्वयं भी एआई से होने वाले नुकसान और खतरे के प्रति चेतावनी देते हैं। जो इसे गंभीर मुद्दा बनाता है।
निष्कर्ष:
कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधुनिक युग की एक क्रांतिकारी और अद्भुत उपलब्धि है। यह निश्चय ही जीवन को तेज़, सरल और सुविधाजनक बनाती है, परंतु एआई से होने वाले संभावित खतरों से मुँह नहीं मोड़ा जा सकता। इसके परिणामस्वरूप बेरोज़गारी, स्वचालन पर अत्यधिक निर्भरता, गोपनीयता का संकट और नैतिक मूल्यों का अभाव जैसी चुनौतियाँ निश्चित रूप से सामने आती हैं।
एक कथन है:
“बुद्धिमत्ता केवल ज्ञान नहीं है, बल्कि ज्ञान का सही उपयोग है।”
एआई का विकास सही दिशा, नियमन और अन्तर्राष्ट्रीय सहयोग के साथ किया गया तो यह देश और विश्व के लिए वरदान होगा, अन्यथा इसके अनियंत्रित प्रयोग से यह देश और विश्व के लिए गंभीर खतरे का कारण भी बन सकता है।
✍️ यह निबंध डॉ. प्रत्यांचा प्रसाद द्वारा लिखा गया है। इसमें प्रयुक्त तथ्य और जानकारी इंटरनेट स्रोतों से प्राप्त की गई हैं तथा साथ ही लिए गए इमेज फ़ाइल का स्रोत भी इसमें उद्धृत (cite) किया गया है, जो निबंध के शीर्ष पर लगाया गया है।
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